मित्र राष्ट्रों की सेनाओं द्वारा जापान को सबक सिखाया

मित्र राष्ट्रों की सेनाओं द्वारा जापान को सबक सिखाया

25 अगस्त को जर्मन अधिकृत पेरिस का भी पतन हो गया और जर्मन सेनाओं ने आत्मसमर्पण कर दिया। फ्रांस को मुक्त कराने के पश्चात् मित्र राष्ट्रों की सेनाओं ने मध्य यूरोप में जर्मनी के अधीन राज्यों को मुक्त कराया । रूस ने जिन क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की थी और बाद में जिन पर जर्मनी का अधिकार हो गया था, अब रूस ने पुनः उन पर अधिकार कर लिया | बाल्कन प्रायद्वीप के लगभग सभी राज्य मित्र राष्ट्रों के पक्ष में हो गये | नवम्बर, 1944 में मित्र राष्ट्रों की सेनाओं ने हालैण्ड की तरफ से जर्मनी में प्रवेश किया | जब मित्र राष्ट्रों की सेना राइन नदी पार कर गयी, तब तो जर्मनी की अन्तिम घड़ी दिखाई देने लगी | जर्मन जनता हिटलर के विरुद्ध हो गई और उसकी हत्या का षड़यन्त्र रचा जाने लगा | इसी बीच रूसी सेनाएँ पूर्वी क्षेत्र में जर्मनी के अधीन राज्यों को मुक्त करवाती हुई बर्लिन की ओर बढ़ी 1 22 अप्रेल, 1945 को रूस ने बर्लिन पर आक्रमण किया । ब्रिटेन, फ्रांस तथा अमेरिका की फौजें भी वहाँ पहुँच गयी | अन्त में 2 मई, 1945 को बर्लिन का पतन हो गया तथा 4 मई को जर्मन सेनाओं ने आत्मसमर्पण कर दिया | हिटलर ने अपनी पत्नी इवानाने सहित आत्महत्या कर ली और इटली के देशभक्तों ने मुसोलिनी और उसकी पत्नी को गोली से उड़ा दिया | 7 मई, 1945 को सन्धि पर हस्ताक्षर करने के पश्चात् 8 मई को यूरोप में युद्ध बन्द हो गया ।

जापान की पराजय और विश्वयुद्ध का बन्त-

अब केवल जापान ही ऐसा राष्ट्र बचा था, जिसने आत्मसमर्पण नहीं किया था | अतः जर्मनी की पराजय के पश्चात् जापान की ओर मित्र राष्ट्रों का ध्यान जाना स्वाभाविक था । मित्र राष्ट्र यूरोप में युद्धरत रहते हुए भी प्रशान्त महासागर में जापान द्वारा अधिकृत क्षेत्रों पर पुनः अधिकार करने का प्रयत्न करते रहे । अब ब्रिटिश फौजें सुदूरपूर्व में तेजी से बढ़ने लगी और उन्होंने बर्मा को मुक्त करवा लिया । तत्पश्चात् मलाया, फिलिपाइन व सिंगापुर मुक्त कराये गये । अन्त में जापान पर भीषण आक्रमण हुआ । 26 जुलाई, 1945 को पोट्सडम सम्मेलन में मित्र राष्ट्रों ने जापान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की माँग की किन्तु जापान ने इसे स्वीकार नहीं किया । फलतः 6 अगस्त, 1945 को जापान के समृद्ध नगर हिरोशिमा पर अमेरिका द्वारा पहला अणुबम गिराया गया । इसके तीने दिन पश्चात् 9 अगस्त को नागासाकी नगर पर दूसरा अणुबम गिराया गया । अणुबमों के प्रलयंकारी विनाश से भयभीत होकर जापान ने 10 अगस्त को ‘पोट्सडम घोषणा की शतों के आधार पर आत्मसमर्पण करने का प्रस्ताव भेजा | 14 अगस्त को युद्ध बन्द हो गया । इस प्रकार 6 वर्ष के बाद मर्यकर व विनाशकारी द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया।

द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव

द्वितीय विश्व युद्ध लगभग 6 वर्ष चला । यह मानव इतिहास का सर्वाधिक क्रूर, भयानक और विनाशकारी युद्ध था तथा इतना व्यापक और प्रभावकारी था कि उसके साथ ही एक युग का अन्त हुआ । द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् यूरोप के इतिहास में अनेक नई प्रवृत्तियों का उदय हुआ । फ्रांस की राज्य क्रान्ति के पश्चात् लोकतन्त्र शासन और राष्ट्रीयता की जिन नयी प्रवृत्तियों की प्रादुर्भाव हुआ था, वे प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् प्रायः सफल हो गयी थीं । किन्तु विश्व युद्ध के पश्चात् दे प्रवृत्तियां पुरानी पड़ गयी थी और मानव समाज उनसे बहुत आगे बढ़ गया । राष्ट्रीयता की भावना क्षीण होने लगी थी, उसका स्थान अब वे नई विचारधाराएँ लेने लगी थी, जो समाज को एक नये रूप से संगठित करना चाहती थीं । व्यावसायिक क्रान्ति तथा वैज्ञानिक उन्नति के कारण जनसाधारण में जो एक नयी जागृति, नई चेतना उत्पन्न हो गयी थी उसने समाज के आर्थिक संगठन के प्रश्न को बहुत महत्त्वपूर्ण बना दिया । इस युद्ध के विभिन्न प्रभावों और परिणामों को निम्नलिखित शीर्षकों में दर्शाया जा सकता है

1. दो विचारधाराओं में विभाजित समाज-

विश्व युद्ध के बाद यूरोप के इतिहास में अनेक नई प्रवृतियों का प्रादुर्भाव हुआ । राष्ट्रीयता की भावना अब कुछ क्षीण होने लगी थी, उसका स्थान अब वे नई विचारधाराएँ लेने लगी, जो समाज को एक नये रूप में संगठित करना चाहती थीं। इस समय का समाज दो प्रमुख विचाराधाराओं में विभाजित था । प्रथम साम्यवाद या कम्युनिज्म तथा दूसरा लोकतन्त्रवाद या डेमोक्रेसी । साम्यवादी चाहते थे कि उत्पत्ति के साधनों पर व्यक्तियों का स्वामित्व न रहे और वे समाज की सम्पत्ति हो जायें तथा कोई भी व्यक्ति श्रम किये बिना आमदनी प्राप्त न कर सके । समाज में ऊँच-नीच का भेदभाव मिट जाये,विविध श्रेणियों तथा वर्गों का अन्त हो जाये और सब व्यवसाय राज्य के अधिकार में आ जाये । इसी तरह लोकतंत्रवादी यह स्वीकार करते थे कि समाज में छोटे-बड़े का भेद दूर होना चाहिए पर उनका यह विचार था कि सम्पत्ति की उत्पत्ति, विनिमय और वितरण पर राज्य कानूनों द्वारा इस प्रकार नियंत्रण स्थापित होना चाहिए जिससे पूंजीपति और मजदूर, जमींदार और किसान सबमें समन्वय बना रहे और सबको सम्पत्ति का यथोचित भाग मिलता रहे । इन दोनों विचारधाराओं ने प्रत्येक देश व राष्ट्र की जनता को दो पृथक् भागों में विभाजित कर दिया । फ्रांस के साम्यवादी अपने विचारों के कारण रूस के साम्यवादियों के अधिक समीप थे, अपेक्षाकृत फ्रांस के ही उन लोगों के, जो साम्यवादी नहीं थे। विश्व युद्ध के समय, इंग्लैण्ड और फ्रांस में बहुत से लोगों ने अपनी राष्ट्रीय सरकारों के विरुद्ध शत्रु देशों की सहायता करने में संकोच नहीं किया, कारण यह है कि उनकी विचारधारा वही थी जिसके विरुद्ध उनकी राष्ट्रीय सरकार युद्ध कर रही थी । राष्ट्रभक्ति, देश प्रेम और मातृभूमि के लिये मर मिटने की भावना का स्थान अब विचारधारा के प्रति भक्ति लेने लगी थी

2. राष्ट्रीय भावना की निर्बनता-

वैज्ञानिक प्रगति द्वारा मनुष्य ने देश और काल पर अद्भुत विजय प्राप्त कर ली थी | भाषा, धर्म, नस्ल व संस्कृति आदि के कारण मानव समाज में जो भेद है, उनका महत्त्व अब इस वैज्ञानिक उन्नति के कारण कम हो गया है । किसी समय विविध कबीले, फिरके, गण आदि एक दूसरे से अलग होते थे। बाद में उनके भेद शिथिल पड़ते गये और विविध कबीले व बिरादरियाँ एक सूत्र में संगठित होकर राष्ट्र के हित में एक बड़ा संगठन बनाने में सफल हुई। ये राष्ट्र बड़े संगठनों में संगठित होने लगे |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *